मेरी पहली चुदाई

मैं एक २६ साल का लड़का हूँ। पाठको ! मै आप लोगों को अपने जीवन की पहली चुदाई की असली कहानी बताता हूँ।

जब मैं कॉलेज़ का छात्र था कहानी तब की है।

एक दिन मैं अपने घर में बैठा था। तभी मेरे घर पर मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटी मेरे घर पर आई और उनके साथ में उनकी भांजी भी थी। वह भी मेरी ही उम्र की थी।

सभी लोग बैठे बात कर रहे थे, मेरा मन उसकी ओर लगा हुआ था। उसका भी मन शायद मेरी तरफ खिंचा हुआ था।

कुछ देर बाद सभी लोग कमरे से निकल कर बाहर चले गये। कमरे में केवल वह लड़की और मैं ही बचे थे। वह मेरे पास आकर बैठ गई और बातें करने लगी।

अचानक मेरे दिल में पता नहीं कहाँ से विचार आया और मैंने उसको खींच कर अपने घुटनों पर बैठा लिया, वह कुछ नही बोली और उसने आँखें बन्द कर ली। वह स्कर्ट व टी-शर्ट पहने हुए थी। मैंने उसके टी-शर्ट में हाथ डाल दिया और उसके उभारों को दबाने लगा। वह आँखें बन्द करके चुपचाप बैठी रही, मैं उसकी चूचियाँ दबाता रहा।

वह सिसकियाँ लेनी लगी। करीब १५ मिनट तक मैं उसकी चुचियाँ मसलता रहा, वह सिसकियाँ लेती रही। मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया था जो उसकी गांड में गड़ने लगा था। सिसकियाँ लेते हुए उसने कहा- नीचे कुछ गड़ रहा है !

मैने कहा कि यह मेरा लौड़ा है जो आपके अन्दर घुसना चाहता है !

उसने कहा- डाल दो, मै बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ !

यही मेरा हाल था, लेकिन डर भी लग रहा था कि कोई आ न जाये। यह सोच कर मैने कहा कि कुछ देर बाद हम लोग मिलते हैं। वह चली गई।

करीब दो घंटे बाद जब अंधेरा हो गया, तब वह फिर आई, मैं चुपके से उसको लेकर छत पर चला गया।

छत पर जाते ही उसको जमीन पर ही लिटाकर मैंने उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी पैटी उतार दी और अपना लण्ड उसकी बुर पर रख कर चोदने की कोशिश करने लगा। उसकी बुर बिल्कुल बद थी, चूत के होंठ आपस में चिपके हुए थे। वो शायद कभी चुदी नहीं थी।

मेरा लण्ड बुर में घुस नहीं रहा था और मै जबरदस्ती घुसेड़ने में लगा हुआ था, वह दर्द से कराहने लगी। मैं उसकी चूचियाँ दबा-दबा कर चोदने की कोशिश कर रहा था।

कुछ देर बाद मेरा लण्ड उसकी बुर को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। वो बड़ी जोर से चीखी, मगर मैंने उसके होंठ अपने हाथ से दबा दिए और उसकी आवाज़ घुट कर रह गई। मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा। हम लोग मदहोश हो गए और चुदाई करते रहे।

यह मेरी पहली चुदाई थी, अतः मै कितना मस्त था बता नहीं सकता। जब हम लोग निबट कर खड़े हुए तो देखा कि उसकी योनि से खून बह रहा है। खून मेरे लण्ड से भी बह रहा था क्योंकि मेरे लण्ड में नीचे की तरफ लगी हुई खाल फट गई थी और उसकी बुर की भी सील टूट गई थ

Read More

बचपन की चुदाई

बात उस वक्त की है जब मैं १९ साल का था, और कॉलेज में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक लड़की थी, वह भी मेरे ही कॉलेज में पढ़ती थी। उसका नाम अरूणा था, वो बहुत ही सुन्दर थी। मैं जब भी उसको देखता तो मेरा लण्ड जोश में आ जाता। मैं मन ही मन उसे चोदने की इच्छा रखता था, वो भी मुझे अक्सर देखा करती थी।

एक दिन उसके घर कोई नहीं था, वो छत पर खड़ी थी, तो मैं भी उसकी छत पर जा पहुँचा, और सीधे जाकर उससे बोला "मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ, अगर तुम बुरा न मानो तो..."

"जो भी कहना चाहते हो बोल दो," उसने प्रत्युत्तर में कहा।

"तुम मुझे अच्छी लगती हो, और मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ," मैंने पहले थोड़ा सकुचाते हुए कह ही डाला।

यह सुनकर वो मेरे चेहरे को गौर से देखने लगी। मैं डर गया कि पता नहीं वह क्या करेगी।

उसने कहा - "चलो, नीचे चलो, आज घर पर कोई भी नहीं है," तो मैं उसके साथ नीचे आ गया।

नीचे आते ही वह मुझसे लिपट गई और बोली, "मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन चाहती थी कि तुम्हीं पहले बोलो।"

मुझे तो मानों जन्नत मिल गई, मैं समझ गया कि वो भी चुदासी हो रही है। फिर मैंने देर न करते हुए अपने होंठ उसके होठों पर रख दिये। उसने कुछ नहीं कहा, बल्कि वो मेरा साथ देने लगी। उसके हाथ अब मेरी गर्दन पर लिपट गये, इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने झट से अपना एक हाथ उसकी एक चूची पर डाला और धीरे-धीरे दबाने लगा। वो भी गरम होती जा रही थी। मैंने उससे कहा कि जब हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते ही हैं तो क्यों ना एक दूसरे में समा जाएँ। तो उसने उत्तर दिया, "हाँ, चलो दो जिस्म, एक जान हो जाएँ।"

इतना कह कर वो मेरी पैंट खोलने लगी, और मैंने उसकी सलवार खोल दी। अब हम लोग बिस्तर पर आ गए, फिर मैंने खुद ही अपनी कमीज भी उतार दी, और उसका सूट भी। अब मैं सिर्फ बनियान और अण्डरवियर में था और वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में। वो थोड़ा शरमाने लगी, मैंने कहा नहीं जान, शरमाना नहीं, और यह कहते हुए मैंने अपनी बनियान और अण्डरवियर भी उतार फेंकी।

चूँकि मैं काफी से देर से उसके होठों को चूस रहा था तो मेरा ७ इंच का लण्ड पूरी तरह से खड़ा था जिसे देखते ही वो बोली कि नहीं इसे मैं नहीं ले पाऊँगी, मैं दर्द से मर जाऊँगी। मैंने उसे समझाया कि नहीं कुछ नहीं होगा। काफी समझाने के बाद वह तैयार हो पाई। अब मैंने अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया, वो सहलाने लगी, और इधर मैंने उसकी चूचियाँ चूसनी शूरू कर दीं।

वह भी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी, मैंने एक ऊँगली उसकी चूत में डाली, वो काफी चिकनी-चिकनी थी। मैं समझ गया कि वो चुदने को बिल्कुल तैयार है। मैंने उसे अपना लण्ड चूसने को कहा तो वह मना करने लगी। लेकिन मैंने जब बहुत मनाया तो वह मान गई और मेरा लण्ड उसने अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा, मुझे काफी आनन्द आ रहा था।

थोड़ी बाद जब मुझे लगा कि मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा तो मैंने अपना लण्ड निकाल लिया, और उसे सीधा लिटा दिया और उसकी दोनों जाँघों के बीच आ गया, और अपने लण्ड का टोपा उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी। मैंने मौका देख कर एक जोर का धक्का मारा तो मेरा लण्ड उसकी चूत में तीन इंच अन्दर उतर गया, वो चिल्लाई... निककककककाकालललोओओओओ.... फट गईईईईईईई... हाय मैं मगर गईईईईईई। लेकिन मैंने उसकी कमर कस के पकड़ रखी थी। एक मिनट रूकने के बाद मैंने फिर जोर से धक्का मारा तो मेरा पूरा 7 इंच का लण्ड उसकी चूत में धँस गया, और मैं उसके ऊपर लेट गया। वह मुझे अपने ऊपर से उतारने का प्रयास करने लगी। उसकी आँखों में आँसू छलक पड़े, लेकिन मैं उसके होठों को अपने होठों में लेकर पीने लगा।

थोड़ी देर ऐसे ही उसके होठों को पीता रहा और जब वो सामान्य लगी तो धीरे-धीरे धक्के मारने चालू कर दिये। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि उसके हाथ मेरी कमर पर कसने लगे हैं तो मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ानी शुरू कर दी, अब वह भी बोलने लगी कि हाय मेरे सरताज़... डालो... और थोड़ा सा अन्दर करो... बहुत अच्छा लग रहा है... तो मैंने भी धक्कों की गति और बढ़ा दी।

जब मैंने देखा कि वह बहुत मज़े ले रही है, तो मैंने अपना लण्ड एकदम से बाहर खींच लिया, तो वह पूछने लगी, क्यों निकाल लिया, मेरी जान डाल भी दो ना अच्छे से..., तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा, तो वह तुरन्त ही घोड़ी बन गई। अब मैंने पीछे से लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा।

थोड़ी देर बाद ही वह कहने लगी... हायययययय.... मैं गईईईईईईईई... हाययययययय्य्य डाल दो पूरा अन्दर। मैंने भी ज़ोरों के धक्के मारने जारी रखे। अचानक मैंने देखा कि उसका शरीर अकड़ गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लेकिन मैं अभी झड़ने के करीब नहीं आया था, मैंने फिर से उसे सीधा लिटाया और उसकी चूत की सवारी करने लगा। मैं धक्के मारता रहा, अब वो मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी, लेकिन मैंने धक्के लगाने चालू रखे, तो दो मिनट के बाद ही वो फिर से मेरा साथ देने लगी। अब उसे दुबारा से मज़ा आने लगा था।

मैंने अपनी गति फिर से बढ़ा दी, अब वह फिर से बोलने लगी कि और डालो जानूँ... और डालो। मैं भी से अच्छे से पेलता रहा, फिर थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने उसे यह बताया, तो वह बोली कि अन्दर ही झड़ना, आज हमारी सुहागरात है, और मैं तुम्हारा रस अपने अन्दर ही डलवाना चाहती हूँ। तो मैं जोश में आ गया, और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत की गरमी निकालने लगा। इसके एक मिनट बाद ही उसकी बाँहें फिर से मेरी कमर पर कस गईं, और मैं समझ गया कि वह फिर से झड़ गई है। अब मैंने भी आठ-दस लम्बे-लम्बे से धक्के मारे और मैं भी उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया। मेरे लण्ड ने भी उसके अन्दर पिचकारी छोड़ दी।

उस दिन दोस्तों, मैंने उसे पाँच बार चोदा, और हमारा चुदाई का यह सिलसिला चालू हो गया। मैं उसे आज तक चोद रहा हूँ, हालाँकि उसकी शादी हो चुकी है, लेकिन फिर भी जब भी मौका मिलता है, वह मुझसे चुदवा लेती है।

Read More

भाभी और उसकी बहन के साथ सेक्स

मैं मुकेश, राजस्थान से, एक अच्छे व्यक्तित्व वाला और अच्छा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं आप को एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

मेरा एक दोस्त है राहुल। राहुल और मैं साथ साथ पढ़े लिखे, मगर राहुल की शादी मुझसे पहले हो गई। राहुल एक पायलट है। उसकी शादी शिमला की निधि नाम की लड़की से हुई थी। वो जब भी बाहर जाता मुझे हमेशा कह कर जाता कि निधि का ख्याल रखना। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ोर था।

एक दिन मैं भाभी के घर गया, दरवाज़ा बन्द था, मैंने बेल बजाई मगर कुछ देर तक कोई नहीं आया। कुछ देर बाद राहुल की ३ साल की बेटी ने दरवाज़ा खोला।

मैंने उससे पूछा- मम्मी कहाँ है?

तो वो बोली- मम्मी अपने कमरे में काम कर रही हैं, मैं उसके कमरे की तरफ़ गया, मुझे वहाँ कोई नहीं दिखाई दिया। मैं वापिस आ रहा था कि इतने में मुझे बाथरूम से कुछ आवाज़ आई-आ ऽऽऽआआ आआआऽऽऽऊऊऊऊम्मम्मम्मम्मम्म ।

मुझे आवाज़ अजीब सी लगी और मैं बाहर चला आया। कुछ देर बाद भाभी बाथरूम से बाहर निकली बिना कपड़ों के पूरी नंगी। उनको नंगा देख कर मेरा लण्ड जो कि ८ इन्च का है खड़ा हो गया। भाभी जल्दी से बाथरूम की तरफ़ भाग गई और तौलिया लपेट कर बाहर आई। मुझे काफ़ी डर लग रहा था कि भाभी मुझ पर चिल्लाएंगी। मगर भाभी मेरे पास आई और मुझसे कहने लगी- मुकेश तुम कब आये?

मैं उनकी बातें समझ नहीं पा रहा था। मैंने भाभी से कहा- मैं चलता हूँ, फ़िर आऊँगा।

मैं घर पहुँचा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मुझे सारा दिन सारी रात भाभी का वही नंगा बदन याद आ रहा था। बार बार मेरा लौड़ा खड़ा हुए जा रहा था। मैंने उसे एक हसीन सपना समझकर भूलने की काफ़ी कोशिश की मगर भूल नहीं पा रहा था।

लेकिन एक दिन अचानक मेरे सेल पे भाभी का कॉल आया और उन्होंने मुझे घर आने को कहा। मुझे लगा कि शायद भाभी को कोई काम होगा इसलिये बुलाया है, मैं घर पहुँचा, मैंने दरवाज़े पर घण्टी बजाई, भाभी ने गेट खोला और मुझे अंदर आने को कहा। मैंने भाभी से पूछा कि श्वेता कहाँ है?

तो वो बोली- अपनी सहेली के घर गई है।

उन्होंने मुझे अपने कमरे में आने को कहा और मैं उनके पीछे चला गया।

मैंने वहाँ एक १८-१९ साल की लड़की को देखा। मैंने भाभी से पूछा- यह कौन है?

तो भाभी बोली- ये मेरे मामा की लड़की है, कल ही शिमला से आई है। उसका नाम रानी है।

मैंने भाभी से पूछा- भाभी ! कुछ काम था जो आपने मुझे याद किया?

तो भाभी बोली- क्या काम होगा, तभी बुला सकती हूँ क्या?

मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि भाभी क्या चाहती हैं मुझसे। फिर मैं रानी से बातें करने लगा और धीरे धीरे वहो मेरे करीब आने लगी । उसने मेरे लण्ड पे हाथ रखा मेरा, लण्ड खड़ा हो गया। मैं बेकाबू हो गया, मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। मुझे कुछ ख्याल नहीं था कि मैं कहाँ और किसके घर में हूँ।

मुझमें और जोश आने लगा, मैं उसके स्तन जो कि काफ़ी छोटे और नरम थे ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। वो मुझसे कहने लगी- धीरे करो मुकेश !

मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मेरा लण्ड बहुत तड़प रहा था। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरु किए और सारे कपड़े उतार दिये। उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिये, बस अण्डरवीयर उतरना बाकी था।

उसमें भी काफ़ी जोश आ चु्का था, उसने मेरा अण्डरवीयर फ़ाड़ दिया और कहने लगी- जल्दी डालो मुकेश जल्दी डालो ! मुझसे रहा नहीं जा रहा !

मैंने उसकी छोटी सी चूत में अपना लण्ड डाला, वो ज़ोर से चिल्लाई- मुकेश ! आऽऽऽऽआआआअह्हह्हह बाहर निकालो !

इतने मैं भाभी आ गई और उन्होंने हम दोनो को नंगा देखा तो उनमें भी जोश आ गया और वो भी अपने कपड़े उतारने लगी। मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।

फिर उन्होंने मुझे अपने बेड पे धकेल दिया और मेरे ऊपर रानी को बैठाया और कहने लगी- अपना लण्ड इसकी चूत में डालो ! मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाला। वो फिर ज़ोर से चिल्लाई- आआऽऽऽऽऽऽह्हह्हह्हह्हह्ह...! मुकेश धीरे !

मुझसे अब नहीं रहा जा रहा था, मैंने ज़ोर ज़ोर से चूत मारना शुरु कर दिया।

वो चिल्लाने लगी- आआआअ...ह्हह्हह्हह्हह्ह...ई.........ऊउ ..................... हाय रे...... !

मैं और ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा। १०-१२ शॉट के बाद मेरा माल निकल गया और उसकी चूत में से खून निकलने लगा, वो डर गई मगर भाभी ने कहा- कुछ नहीं पहली बार ऐसा ही होता है।

उसके बाद मैं अपने कपड़े पहन ही रहा था कि भाभी मुझसे कहने लगी- नहीं मुकेश ! रुको ! अभी मैं बाकी हूँ !

मैं उस दिन काफ़ी जोश में था। अब भाभी मेरे ऊपर थी और मैं उनके होंठों पे किस कर रहा था। मुझमें काफ़ी जोश आ रहा था। वो मेरे लण्ड को चूसने लगी।

आआआआ...ह्हह्हह्हह्हह.........ओ.........हज.........ह्ह्हह्हह्हह्हह्ह।प.........प्पपप्पप्पु......स्सस्सस्सस्सस्स............ह्हह्हह्हह्हह।

मुझे काफ़ी मजा आ रहा था। उन्होंने मुझमें और जोश ला दिया। फिर मेरा लण्ड खड़ा हो गया और मुझसे रहा नहीं गया। मैंने अपना लण्ड भाभी की चूत में डाल दिया।

वो कहने लगी- मुकेश तुम में काफ़ी जोश है ! मेरी प्यास बुझा दो।

मेरे दिलो-दिमाग पे भाभी छा रही थी, मैं भी बेकाबू हो गया था। मैं शॉट मारने लगा।

भाभी आआआआआआअ......न...इ.........स...............ए.........जी...तु...... कहने लगी।

मैं और ज़ोर ज़ोर से शॉट मारने लगा। उन्हें काफ़ी मजा आ रहा था। वो कम ओन मुकेश ...कम ओन मुकेश .........डू इट ! कह रहि थी और मैं पूरे जोश से शॉट मार रहा था, लेकिन इस बार मेरा माल बाहर नहीं आ रहा था। मैं और ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा।

भाभी आआ............ह.........ह्हह्हह्हहह्हहह...............ऊऊऊऊऊऊऊऊओ...स.........सओ......म......ए... मुकेश ! कहे जा रही थी। १५ बार शॉट मारने के बाद मेरा माल निकल गया और फिर कुछ देर के लिये मैं उनसे लिपट गया। उसके बाद मैंने कपड़े पहने और भाभी से कहा- मैं अब घर जा रहा हूँ !

भाभी कहने लगी- मुकेश आते रहना !

और उसके बाद हमारा सिलसिला ऐसा ही चलता रहा।

लेकिन एक दिन राहुल का तबादला दिल्ली हो गया और हम दोनों जुदा हो गये।

मुझे आज भी भाभी की याद सताती रहती है और साथ साथ रानी कि भी जो शिमला वापिस चली गई।

मुझे आज भी किसी भाभी का या किसी रानी का इन्तज़ार है !

आपको मेरी कहानी कैसी लगी?

आप मुझे मेल करें !

आपका यह दोस्त मुकेश फिर एक कहानी लेकर आपके सामने जल्द ही हाज़िर होगा !

Read More

स्वर्ग का अनुभव-२

गुरूजी आपने मेरी सही अनुभव वाली कहानी स्वर्ग का अनुभव प्रस्तुत की, उसके लिए मैं आपका बहुतआभारी हूँ।

मैंने कभी सोचा भी नहीं था किमुझे इतने सारे मेल आयेंगे, खास करके लड़कियों और औरतो के मुझेबहुत मेल आए। आपका इतना प्यार देखकर मुझे एक और सही अनुभव वाली कहानी प्रस्तुत करने कीप्रेरणा मिली है। इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है बल्कि मेरे साथ जो हो चुका है वो ही मैं आपकोबता रहा हूँ।कहानी को रसदार बनाने के लिए मैंने इसमें कोई बात भी अपनी तरफ़ से नहीं जोड़ी है।

कहानी प्रस्तुत करने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मैं अहमदाबाद में रहने वाला लड़काहूँ, मेरी उम्र ३५ साल की है। दिखने में स्मार्ट हूँ। मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट एक्जीक्यूटिव कीजॉब करता हूँ। मैं जिस कंपनी में काम करता हूँ, उसकी मैडम के साथ मेरा सम्बंध है। उसकी उम्र ४५साल है। वो दिखने में बहुत खूबसूरत है। उसको मेरे पर बहुत भरोसा है और वो भरोसा मैं कभी नहींतोडूंगा। यह उसी की कहानी है।

एक दिन छुट्टी से पहले वाले दिन हमने छुट्टी के दिन कहीं पर मिलने का नक्की किया(कार्यक्रमबनाया)।

उसने कहा- घर मे मिलने से कोई न कोई आता जाता रहता है, इसलिए हम किसी होटल में मिलते हैं।तुम कोई अच्छा सा ए सी कमरा बुक करना।

फ़िर दूसरे दिन मैं सुबह होटल का कमरा खोजने निकल गया। मैंने एक अच्छे होटल में ए सी कमरे कारेट पूछा, उसने मुझे ४ घंटे के ७०० रूपए बताये, मैंने कमरा बुक कर लिया फ़िर मैंने मैडम को बताया केमैंने एसी कमरा बुक कर लिया है। मैंने होटल का पता मैडम को दे दिया और कहा- मैंने यहाँ पर अपनेनाम बदल कर कमरा बुक किया है। आप यहाँ आ कर अपना नाम पूजा बताना और कहना कि मुझेअनिल से मिलना है जो २०३ नम्बर के कमरा में ठहरे हैं। तो उसने सब बात समझ ली और मुझे दोपहरको २ बजे वहाँ आने का बोल दिया।

मैंने तो १ बजे कमरे में जा कर स्नान कर लिया।

अब वो करीब २ बजे मेरे कमरे में आ गई। उसने भी 'मैं फ्रेश होकर आती हूँ' कह के स्नान कर लिया, क्योकि जब हम स्नान कर के सेक्स करते हैं तो मजा दुगना हो जाता है। फ़िर वो स्नान कर के सिर्फ़तौलिया लपेट कर बाहर आ गई। मैं तो उसको देख कर देखता ही रह गया। वो तौलिये में बहुत खूबसूरतलग रही थी। मैं तो पहले से ही तौलिये में था।

फ़िर हम दोनों पलंग पर आ गए। हमने कुछ बीते हुए पलों के बारे में बात की। फ़िर मैंने उसके गाल परऔर होठों पर किस किया, उसका तौलिया निकाला, उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। मैंने उसेएक बार कहा था कि तुम पर लाल रंग की ब्रा और पैंटी खूब जमती है। उसने वो याद रख लिया था औरऐसा ही किया था। वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

फ़िर मैंने उसके सारे बदन पे चुम्मी ली। उसकी पैंटी के साथ में ही उसके चूतड़ को भी चूमा, उसके पैर केअंगूठे को भी चूमा, उसके कान को भी चूमा। उसका कोई अंग ऐसा नहीं रहा था कि मैंने उसे वहाँ चूमा नहो। फ़िर मैंने उसके होठों को अपने होठों से लगा लिया। हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूसरे के मुँह में मुँहरख कर चूमते रहे। उसकी जीभ से अपनी जीभ लगा कर हम दोनों ने एक दूसरे का रसपान किया। हमदोनों दो नहीं बल्कि एक ही हैं ऐसा हमको महसूस होता था।

फ़िर मैंने उसकी ब्रा को निकाला। उसके स्तन बहुत बड़े और रसीले थे। मैं करीब ५ मिनट तक उनकोचूसता रहा। मैं किसी जन्नत की सैर कर रहा हूँ ऐसा मुझे महसूस होने लगा। अब वो बहुत उत्तेजित होचुकी थी। फ़िर उसने मेरे तौलिए को निकाला और मेरी छाती को चूसने लगी। फ़िर उसने मेरे होठों कोचूमा, वो चूमते चूमते नीचे तक आई। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था, वो उसने निकाल दिया।

मैं भी बहुत उत्तेजित हो चुका था, उसने मेरे ७” लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह वोतो उसे चूसने लगी। अब मैं आपे में नहीं रह पाया। वो करीब ५ मिनट तक मेरा लंड चूसती रही। उसकेऐसा करने से मैं झड़ गया। मैंने बाथरूम में जा कर साफ़ कर लिया। फ़िर मैं वापिस आ गया, मैंने उसेबोला- अभी तो शुरूआत है, अब मेरा सेक्स लम्बी देर तक चलता रहेगा।

फ़िर मैंने उसकी पैंटी को निकाला, उसने अपनी चूत के सारे बाल हटा के रखे थे। फ़िर मैंने उसकी चूत कोचाटने का शुरू किया, उसकी चूत में से अजीब सा पानी निकल रहा था, मैं वो सारा पानी निगल गया। वोबहुत उत्तेजित हो चुकी थी और लम्बी लम्बी आहें भरने लगी थी। हम दोनों कहीं स्वर्ग में पहुँच गए होऔर आनंद लूट रहे हों, ऐसा हम दोनों को महसूस हो रहा था। मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में बहुतअन्दर तक ले जाता था।

फ़िर मैंने अपना ७” का लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। फ़िर मैं उसे धीरे धीरे पेलने लगा. करीब २०मिनट तक मैं ऐसे ही पेलता रहा। मैं एक बार झड़ चुका था इसलिए दूसरी बार जल्दी झड़ जाने की कोईगुन्जायिश नहीं थी। अब मैं बहुत जोरों से धक्के देने लगा। वो भी उसमें धक्के दे कर मुझे साथ देने लगी।हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फ़िर हम दोनों साथ में ही झड़ चुके।

फ़िर थोड़ी बात हमने की और हम दोबारा शुरू हो गए। मैंने उसके साथ फ़ोर-प्ले शुरू कर दिया इसलिएवो दुबारा तैयार हो गई। मैंने उसकी चूतड़ को बहुत चाटा और फ़िर मैंने अपना लण्ड उसमें डाल दिया।फ़िर हम दोनों साथ में झड़ गए। यह झड़ना मेरा तीसरी बार का और उसका दूसरी बार का था। वो तोसोचते ही रह गई कि मैं एक ही साथ में तीन बार सेक्स कर सकते हूँ। उसने मुझे कहा- तुम्हारी पत्नीबहुत खुशकिस्मत है जिसे तुम जैसा पति मिला है। मेरे हसबंड बिज़नस के टेंशन में ही रहते हैं। और ६महीने में एक बार सेक्स करते है और उसमें भी मुझे तो मजा नहीं आता। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़सकती।

फ़िर मैंने भी उसे ऐसा वादा करके अपने गले से लगा लिया। हमने करीब ३ घंटे तक सेक्स किया। उसनेकहा कि तुम्हारे साथ तो पूरी रात हो तो भी कम है। ऐसा स्वर्ग का अनुभव हम दोनों ने कभी नहीं किया. मैं अपने बारे में कम और उसके बारे में ज्यादा सोचता हूँ कि उसको ज्यादा से ज्यादा आनंद कैसे मिलपाये।

हम ऐसे ही होटल में एक ही बार नहीं बल्कि बहुत बार मिल चुके हैं।

ऑफिस से निकलते हैं तो रात को उसकी गाड़ी में भी अंधेरे में मिलते रहते हैं।

मैं कोई कथाकार नहीं हूँ, पर यह मेरे सही अनुभव की कहानी है इसीलिए मैं कहानी में जान डाल सकताहूँ।

मेरी सही अनुभव वाली दूसरी कहानी मैं बाद में बताऊंगा अगर तुम्हारे मेल मुझको आते रहेंगे तो ! ख़ासकरके लड़की और औरत के।

Read More